पंजाब ने नशों के विरुद्ध सख्त कानून बनाने के लिए केंद्र को तीन पत्र लिखे, लेकिन भाजपा की केंद्र सरकार ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई: हरपाल सिंह चीमा

पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) सरकार और होम मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पंजाब में फैल रहे सिंथेटिक और मेडिकल ड्रग्स का मेन सोर्स भाजपा और कांग्रेस शासित राज्य हैं, जहां बड़ी संख्या में बैन ड्रग्स और केमिकल्स तैयार किए जा रहे हैं। पंजाब सरकार इस पर लगातार सख्त एक्शन ले रही है, लेकिन केंद्र सरकार अपराधियों पर नकेल कसने के बजाय इस गंभीर मामले को अनदेखा कर रही है।

 

मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि पंजाब में प्रेगाबालिन, गाबा, डायस्टन, डायसन, क्लोमाइन, ट्रामाडोल, ज़ोपिक्लोन, फ्लू प्रैक्टसोल और कैरिस्पोडल्स जैसी बैन दवाओं का नशे के तौर पर गलत इस्तेमाल हो रहा है। ये सभी दवाएं डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना नहीं मिल सकतीं, और हैरानी की बात यह है कि पंजाब में इन दवाओं की एक भी फैक्ट्री नहीं है। ये सभी फैक्ट्रियां हरियाणा, हिमाचल प्रदेश (बद्दी), राजस्थान और गुजरात (अहमदाबाद) जैसे राज्यों में चल रही हैं, जहां भाजपा या कांग्रेस की सरकारें हैं। पंजाब सरकार ने इन दवाओं को एनडीपीएस एक्ट के शेड्यूल में शामिल करने के लिए 31 अक्टूबर 2025 और 21 सितंबर 2026 को हेल्थ डिपार्टमेंट के ज़रिए पत्र भेजे थे, इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर ने भी पत्र लिखे थे, लेकिन केंद्र सरकार ने आज तक कोई पक्का जवाब नहीं दिया है।

 

हरपाल सिंह चीमा ने आबकारी और कराधान मंत्री के तौर पर अपने समय का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मिथाइल अल्कोहल (जो सिर्फ़ इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए है) के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कड़े कानून बनाने की मांग करते हुए केंद्र सरकार को दो पत्र भेजे थे। लेकिन केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल सिर्फ़ ब्रिटिश ज़माने के पुराने कानूनों जैसे 1952 का फ्लेमेबल सब्सटेंस एक्ट, 1934 का पेट्रोलियम एक्ट और 1919 का पॉइज़न एक्ट का हवाला देते हैं। संगरूर और मजीठा में मेथेनॉल पीने से हुई मौतों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन मामलों में फरीदाबाद (हरियाणा) से आने वाले केमिकल का पता चला था, और पंजाब सरकार ने तुरंत उन कंपनियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करके उन्हें जेल भेज दिया था।

 

पंजाब के दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान 2017 से 2022 के बीच पंजाब के अंदर बीएसएफ का दायरा 55 किलोमीटर बढ़ाया गया था, ताकि इंटरनेशनल बॉर्डर से होने वाली ड्रग तस्करी को रोका जा सके। लेकिन गृह मंत्री अमित शाह पूरी तरह से फेल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब पुलिस को मजबूत करने के लिए हर साल हजारों करोड़ रुपये मांगे गए, लेकिन केंद्र ने कोई आर्थिक मदद नहीं दी। इसके उलट, पंजाब देश का इकलौता ऐसा राज्य बन गया जिसने अपने यहां एंटी-ड्रोन सिस्टम लागू किया, जिससे पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन के जरिए ड्रग मॉड्यूल को तोड़ा जा रहा है।

 

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा सरकार काले खेती कानूनों के ज़रिए किसानों को शहीद बना सकती है, लेकिन युवाओं की जान बचाने वाले मेडिकल ड्रग कानूनों में बदलाव करने के लिए उनके पास समय नहीं है। आज भाजपा पंजाब को अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का अखाड़ा बनाना चाहती है। उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ड्रग्स के विरुद्ध पूरी तरह सख्त है। ड्रग्स के विरुद्ध लड़ने वाले हमारे भाई परविंदर सिंह झोटा के मामले में आरोपियों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई के बाद अब इस केस को पूरी पारदर्शिता के लिए सीबीआ को ट्रांसफर करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। पंजाब सरकार ड्रग तस्करों के विरुद्ध अपनी लड़ाई किसी भी कीमत पर रुकने नहीं देगी।